Wednesday, February 6, 2019

नक्षत्रों के स्वामी देवता


किस नक्षत्र का स्वामी देवता कोन है |
किस देवता की पूजा से कोन सा नक्षत्र होता है प्रसन्न |

अश्विनी – अश्विनी कुमार
भरणी – यम
कृतिका – अग्नि
रोहिणी – ब्रह्मा
मृगशिरा – चन्द्रमा

Tuesday, February 5, 2019

किस दिन कोन से देवता की विशेष पूजा करें

तिथियों के स्वामी

किस तिथि को कोन से देवता की पूजा अधिक विशेष फलदायी होती है |

प्रतिपदा – अग्नि
द्वितीया – ब्रह्मा
तृतीया – गोरी
चतुर्थी – गणेश
पंचमी – नाग

Friendzone of Planets


ग्रहों की नैसर्गिक मैत्री

Sunday, November 18, 2018

Agni Vaas 2019-20

अग्नि वास देखने की विधि
सबसे पहले गणना के लिए ध्यान रखना है कि रविवार को 1 तथा शनिवार को 7 संख्या मानकर वार गिने जायेंगे |
शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को 1 तथा अमावस्या को 30 मानकर गणना होगी |

जिस दिन हवन करना हो उसी दिन की तिथि एवं वार की संख्या जोड़कर जो संख्या प्राप्त होगी उसमे 1(+) जोड़ें ,
तत्पश्चात 4 से भाग(divide) करें

Monday, May 21, 2018

Agni Vaas For 2018-19

अग्नि वास देखने की विधि
सबसे पहले गणना के लिए ध्यान रखना है कि रविवार को 1 तथा शनिवार को 7 संख्या मानकर वार गिने जायेंगे |
शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को 1 तथा अमावस्या को 30 मानकर गणना होगी |

जिस दिन हवन करना हो उसी दिन की तिथि एवं वार की संख्या जोड़कर जो संख्या प्राप्त होगी उसमे 1(+) जोड़ें ,
तत्पश्चात 4 से भाग(divide) करें

Friday, November 18, 2016

पिता सम्बन्धी चिंतन नवम भाव से या दशम भाव से ???



यह प्रश्न बहुत ही महत्व पूर्ण प्रश्न है कि पिता सम्बन्धी फलादेश नवम भाव से किया जाये या दशम भाव से,
बृहत् पराशर होरा-शास्त्र के २०वें अध्याय का चतुर्थ श्लोक है कि :
       भाग्य-स्थानात द्वितीये वा सूखे भौम समन्विते |
       भाग्येशे  नीच  राशिस्थे पिता  निर्धन एव हि ||

Wednesday, November 9, 2016

कुण्डली देखने के मूल नियम



१ – यदि कोई ग्रह किसी लग्न विशेष के लिए योग कारक हो परन्तु दिक् बल से शून्य हो तो ऊँचा फल नहीं कर सकता

२ – जब दो से अधिक ग्रहों का परस्पर सम्बन्ध हो तो कोई एक ग्रह अपनी दशा भुक्ति में उन गुणों कि अभिव्यक्ति करेगा जो उन ग्रहों में सांझे हैं जोकि इसे प्रभावित कर रहे हैं

Tuesday, May 24, 2016

राघवयादवीयम् अनुलोम विलोम

क्या ऐसा संभव है कि जब आप किताब को सीधा पढ़े तो रामायण की कथा पढ़ी जाए और जब उसी किताब में लिखे शब्दों को उल्टा करके पढ़े
तो कृष्ण भागवत की कथा सुनाई दे।

जी हां, कांचीपुरम के 17वीं शदी के कवि वेंकटाध्वरि रचित ग्रन्थ "राघवयादवीयम्" ऐसा ही एक अद्भुत ग्रन्थ है।

Saturday, May 21, 2016

आधुनिक विज्ञान एवं सनातन धर्मं

"माँमैं एक आनुवंशिक वैज्ञानिक हूँ। मैं अमेरिका में मानव के विकास पर काम कर रहा हूं। विकास का सिद्धांतचार्ल्स डार्विनआपने उसके बारे में सुना है?" बेटे ने पूछा।
उसकी मां उसके पास बैठी और मुस्कुराकर बोली, “मैं डार्विन के बारे में जानती हूंबेटा। मैं यह भी जानती हूं कि तुम जो सोचते हो कि उसने जो भी खोज कीवह वास्तव में भारत के लिए बहुत पुरानी खबर है।

विधिरहित यज्ञ शत्रु के समान है


:--
"अन्नहीनो दहेद् राष्ट्रं मन्त्रहीनश्च ऋत्विजः ।
यजमानं दानहीनो नास्ति यज्ञसमो रिपुः ।।" (चाणक्य-नीतिः---08.22)
अर्थः----अन्नहीन यज्ञ राष्ट्र कोमन्त्रहीन यज्ञ ऋत्विज् (पुरोहित) को  और दानहीन यज्ञ यजमान को भस्म कर देता है । संसार में (विधिहीन) यज्ञ के समान कोई शत्रु नहीं है ।