१ – यदि कोई ग्रह किसी
लग्न विशेष के लिए योग कारक हो परन्तु दिक् बल से शून्य हो तो ऊँचा फल नहीं कर
सकता
२ – जब दो से अधिक ग्रहों
का परस्पर सम्बन्ध हो तो कोई एक ग्रह अपनी दशा भुक्ति में उन गुणों कि अभिव्यक्ति
करेगा जो उन ग्रहों में सांझे हैं जोकि इसे प्रभावित कर रहे हैं