Showing posts with label navgrah shanti. Show all posts
Showing posts with label navgrah shanti. Show all posts

Friday, February 17, 2023

Agni Vaas for 2023-24

  

अग्नि वास देखने की विधि

सबसे पहले गणना के लिए ध्यान रखना है कि रविवार को तथा शनिवार को संख्या मानकर वार गिने जायेंगे |

शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को तथा अमावस्या को 30 मानकर गणना होगी |

Wednesday, January 19, 2022

Agni Vaas For February and March 2023

 

अग्नि वास देखने की विधि

सबसे पहले गणना के लिए ध्यान रखना है कि रविवार को 1 तथा शनिवार को 7 संख्या मानकर वार गिने जायेंगे |

शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को 1 तथा अमावस्या को 30 मानकर गणना होगी |

Agni Vaas For January 2023

 

अग्नि वास देखने की विधि

सबसे पहले गणना के लिए ध्यान रखना है कि रविवार को 1 तथा शनिवार को 7 संख्या मानकर वार गिने जायेंगे |

शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को 1 तथा अमावस्या को 30 मानकर गणना होगी |


Agni Vaas For December 2022

 

अग्नि वास देखने की विधि

सबसे पहले गणना के लिए ध्यान रखना है कि रविवार को 1 तथा शनिवार को 7 संख्या मानकर वार गिने जायेंगे |

शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को 1 तथा अमावस्या को 30 मानकर गणना होगी |


Agni Vaas For November 2022

 

अग्नि वास देखने की विधि

सबसे पहले गणना के लिए ध्यान रखना है कि रविवार को 1 तथा शनिवार को 7 संख्या मानकर वार गिने जायेंगे |

शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को 1 तथा अमावस्या को 30 मानकर गणना होगी |

Agni Vaas For October 2022

 

अग्नि वास देखने की विधि

सबसे पहले गणना के लिए ध्यान रखना है कि रविवार को 1 तथा शनिवार को 7 संख्या मानकर वार गिने जायेंगे |

शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को 1 तथा अमावस्या को 30 मानकर गणना होगी |

Agni Vaas For September 2022

 

अग्नि वास देखने की विधि

सबसे पहले गणना के लिए ध्यान रखना है कि रविवार को 1 तथा शनिवार को 7 संख्या मानकर वार गिने जायेंगे |

शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को 1 तथा अमावस्या को 30 मानकर गणना होगी |


Agni Vaas For August 2022

 

अग्नि वास देखने की विधि

सबसे पहले गणना के लिए ध्यान रखना है कि रविवार को 1 तथा शनिवार को 7 संख्या मानकर वार गिने जायेंगे |

शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को 1 तथा अमावस्या को 30 मानकर गणना होगी |

Agni Vaas For July 2022

 

अग्नि वास देखने की विधि

सबसे पहले गणना के लिए ध्यान रखना है कि रविवार को 1 तथा शनिवार को 7 संख्या मानकर वार गिने जायेंगे |

शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को 1 तथा अमावस्या को 30 मानकर गणना होगी |


Agni Vaas For June 2022

 

अग्नि वास देखने की विधि

सबसे पहले गणना के लिए ध्यान रखना है कि रविवार को 1 तथा शनिवार को 7 संख्या मानकर वार गिने जायेंगे |

शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को 1 तथा अमावस्या को 30 मानकर गणना होगी |


Agni Vaas For May 2022

अग्नि वास देखने की विधि

सबसे पहले गणना के लिए ध्यान रखना है कि रविवार को 1 तथा शनिवार को 7 संख्या मानकर वार गिने जायेंगे |

शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को 1 तथा अमावस्या को 30 मानकर गणना होगी |


Agni Vaas For April 2022

 

अग्नि वास देखने की विधि

सबसे पहले गणना के लिए ध्यान रखना है कि रविवार को 1 तथा शनिवार को 7 संख्या मानकर वार गिने जायेंगे |

शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को 1 तथा अमावस्या को 30 मानकर गणना होगी |

Tuesday, December 22, 2015

श्री कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम

कस्तूरीतिलकं ललाट पटले वक्षः स्थले कौस्तुभं ।
नासाग्रे वरमोक्तिकं करतले वेणुः करे कंकणम् ।।
सर्वाङ्गे हरिचन्दनं सुललितं कण्ठे च मुक्तावली ।
गोपास्त्रीपरिवेष्टितो विजयते गोपालचूड़ामणिं ।। 

Sunday, December 20, 2015

आशीर्वचन


आयु द्रोणसुते श्रीयं दशरथे शत्रुक्षयं राघवे
ऐश्वर्यं नहुषे गतिश्च पवने मानञ्च दुर्योधने ।।
दानं सूर्यसुते बलं हलधरे सत्यं च कुन्तीसुते
विज्ञानं विदुरे भवतु भवतां कीर्तिश्च नारायणे ।। 

नवग्रहमण्डल


ॐ आवाहितसूर्यादिनवग्रहेभ्यो देवेभ्यो नमः

 ब्रह्मा मुरारिस्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च
गुरुश्च  शुक्रः  शनिराहुकेतवः  सर्वे ग्रहः शान्तिकरा भवन्तु ।।

केतु –


ॐ केतुं कृण्वन्निति मन्त्रस्य मधुच्छन्द ऋषिः गायत्री छन्दः केतुर्देवता केतु प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः ।।

ब्रह्मणः कुलसंभूतम् विष्णुलोकभयावहम्
शिखिनन्तु महाकायं केतुमावाहयाम्यहम् ।।

राहु –


ॐ कया नश्चित्रेति मन्त्रस्य वामदेव ऋषिः गायत्री छन्दः राहुर्देवता राहु प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः ।।

सिंहिकासुत राहवे नमः

चक्रेण छिन्नमूर्द्धानं विष्णुना च निरीक्षितम्
सैंहिकेयं    महाकायं   राहुमावाहयाम्यहम् ।।

शनि –


ॐ शन्नो देवीति मन्त्रस्य सिन्धुद्वीप ऋषिः गायत्रीछन्दः आपो देवता शनि प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः ।।

सूर्यपुत्र शनेश्चराय नमः
  
प्रदीप्तवह्निवर्णाभं नीलाञ्जनसमप्रभम्
छायामार्तण्डसम्भूतं शनिमावाहयाम्यहम् ।।

शुक्र –


ॐ अन्नात्परिस्रुतेति मन्त्रस्य प्रजापति ऋषिः अनुष्टुप्छन्दः शुक्रो देवता शुक्र प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः ।।

दैत्याचार्य भार्गवाय नमः
  
प्रविश्य जठरे शम्भोर्निषक्रान्तः पुनरेव यः
आचार्यमसुरादीनां    शुक्रमावाहयाम्यहम् ।।

बृहस्पति –


ॐ बृहस्पतेति मन्त्रस्य गृत्समद ऋषिः अनुष्टुप्छन्दः ब्रह्मा देवता बृहस्पति प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः ।।

ॐ देवाचार्य बृहस्पतये नमः

गुरुश्रेष्ठं गिरः पुत्रं देवानां च पुरोहितम्
शक्रस्य मन्त्रिणं श्रेष्ठं गुरुमावाहयाम्यहम् ।।