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Tuesday, June 16, 2020

इस ब्लॉग के मन्त्रो का पुस्तक में संकलन

इस ब्लॉग  में दिए गए मन्त्रो का और कुछ अतिरिक्त मन्त्रो का संकलन करके पुस्तक तैयार  की गयी है 

जिसे आप इस लिंक से प्राप्त कर सकते हैं 

Tuesday, October 1, 2019

दुर्गा सप्तशती में देवी के ध्यान


दुर्गा सप्तशती में देवी के ध्यान

खड्‌गं चक्र-गदेषु-चाप-परिघाञ्छूलं भुशुण्डीं शिर:
शंखं संदधतीं करौस्त्रिनयनां सर्वाड्गभूषावृताम्
नीलाश्म-द्युतिमास्य-पाददशकां सेवे महाकालिकां
यामस्तौत्स्वपिते हरौ कमलजो हन्‍तुंमधुं कैटभम् ॥ १

Sunday, December 20, 2015

देवीमयी

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तव  च  का  किल  न स्तुतिरम्बिके
            सकलशब्दमयी किल ते तनुः

बगलामुखी ध्यान -

शत्रु संहार के लिए या किसी गुप्त या प्रत्यक्ष शत्रु के किये हुए प्रहार को निष्फल करके उसी पर वापस करने के प्रयोग के लिए माँ बगलामुखी बहुत प्रसिद्ध है 
माता को पीला रंग प्रिय है । शत्रु इनके सामने नहीं टिक सकते । माता बगलामुखी के मंत्रो का जाप करने के लिए साधक को कड़े नियमो का पालन करना अति आवश्यक है । वैसे तो हर मंत्र का अपना नियम पालन होना जरुरी है क्योंकि नियम से न चलने के कारण मंत्र का दुष्प्रभाव भी सामने आता है । लेकिन बगलामुखी माँ पीताम्बरा के नियम

सप्त घृत मातृका पूजन -


ॐ वसोः पवित्रमसि शतधारं वसोः पवित्रमसि सहस्रधारं
देवस्त्वा सविता पुनातु वसोः पवित्रेण शतधारेण सुप्वा कामधुक्षः ।।

     १.    श्रियै नमः
     २.    लक्ष्म्यै नमः
     ३.    धृत्यै नमः

चतुःषष्टि योगिनी पूजनम् –


ॐ आवाहयाम्यहम् देवीं योगिनीं परमेश्वरीम्
योगाभ्यासेन  संतुष्टा  परं  ध्यानसमन्विता ।।
दिव्यकुण्डलसंकाशा  दिव्यज्वाला  त्रिलोचना
मूर्तिमतीह्यामूर्त्ता    उग्रा  चैवोग्ररूपिणी ।।
अनेकभावसंयुक्ता        संसारार्णवतारिणी ।।
यज्ञे  कुर्वन्तु  निविघ्नं श्रेयो यच्छ्न्तु मातरः ।।
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दिव्ययोगी महायोगी सिद्धयोगी  गणेश्वरी
प्रेताशी  डाकिनी  काली  कालरात्री निशाचरी ।।
हुङ्कारी  सिद्ध्  वेताली  खर्परी  भूतगामिनि ।।
उर्ध्वकेशी  विरूपाक्षी  शुष्कांगी  मांसभोजिनी
फूत्कारी   वीरभद्राक्षी   धूम्राक्षी  कलहप्रिया ।।
रक्ता च घोररक्ताक्षी विरूपाक्षी भयंकरी
चौरिका भारिका चण्डी वाराही मुण्डधारिणी ।।
भैरवी चक्रिणी क्रोधा दुर्मुखी प्रेतवासिनि
कालाक्षी मोहिनी चक्री कंकाली भुवनेश्वरी
कुण्डला तालकौमारी यमदूती करालिनि ।।
कौशिकी यक्षिणी यक्षी कौमारी यन्त्रवाहिनी ।।
दुर्घटा विकटा घोरा कपाला विषलन्घना
चतुःषष्टिः समाख्याता योगिन्यो हि वरप्रदाः ।।
त्रैलोक्यपूजिता नित्यं देवमानुषयोगिभिः ।।


ॐ चतुःषष्टियोगिनीभ्यो नमः ।।



हमारे ब्राह्मणों से पूजन हवन अनुष्ठान रुद्राभिषेक इत्यादि स्वयं के लिए अथवा अपने प्रियजनों के लिए करवाने के लिए निम्नलिखित जानकारी दें ।
(यदि आप स्वयं उपस्थित हो सकें तो अधिक उत्तम है ।
यदि किसी कारण स्वयं उपस्थित न हो सके तो निम्नलिखित जानकारी दें ।)
1, आपका पता - मकान न०, गली न०, मोहल्ला,शहर, ज़िला, राज्य आदि । (आपको प्रसाद इसी पते पर भिजवाया जाएगा)
2, आपका गोत्र ।
3, आपका नाम तथा आपके परिवार के अन्य सदस्यों के नाम ।
4, आपका whatsapp नम्बर ।
5, आपकी जन्म कुंडली या जन्म समय, जन्म तारीख, जन्म स्थान ।
6, आपकी फोटो ।


हमारा संपर्क सूत्र –         9464532794            7888548882

षोडश मातृका –


  

ब्रह्माणी कंलेन्दु सोम्यवदनं माहेश्वरी लीलया
कौमारी रिपुदर्विनाशन करि चक्रायुधा वैष्णवी ।।

श्री पूजन (लक्ष्मी) –

. ॐ आद्यलक्ष्म्यै नमः,
. ॐ विद्यालक्ष्म्यै नमः,   
. ॐ सोभाग्यलक्ष्म्यै नमः

ज्योति पूजन –


चन्द्रमा मनसो जातश्चक्षोः सूर्यो अजायत
श्रोत्राद्वायुश्च प्राणश्च मुखादग्निरजायत ।।

Friday, December 18, 2015

सरस्वती वंदना


या कुन्देन्दु तुषार हार धवला या शुभ्र वस्त्रावृता 
या वीणा वर दण्डमण्डित करा या श्वेत पद्मासना ।।