Friday, December 20, 2019

Agni Vaas 2020-21


अग्नि वास देखने की विधि
सबसे पहले गणना के लिए ध्यान रखना है कि रविवार को 1 तथा शनिवार को 7 संख्या मानकर वार गिने जायेंगे |
शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को 1 तथा अमावस्या को 30 मानकर गणना होगी |

जिस दिन हवन करना हो उसी दिन की तिथि एवं वार की संख्या जोड़कर जो संख्या प्राप्त होगी उसमे 1(+) जोड़ें ,


तत्पश्चात 4 से भाग(divide) करें

Tuesday, October 1, 2019

दुर्गा सप्तशती में देवी के ध्यान


दुर्गा सप्तशती में देवी के ध्यान

खड्‌गं चक्र-गदेषु-चाप-परिघाञ्छूलं भुशुण्डीं शिर:
शंखं संदधतीं करौस्त्रिनयनां सर्वाड्गभूषावृताम्
नीलाश्म-द्युतिमास्य-पाददशकां सेवे महाकालिकां
यामस्तौत्स्वपिते हरौ कमलजो हन्‍तुंमधुं कैटभम् ॥ १

Monday, July 29, 2019

अग्नि वास देखने की सरलतम विधि

अग्नि वास देखने के लिए एक कोष्ठक में शुक्ल पक्ष व कृष्ण पक्ष की तिथियाँ दी गयी हैं तथा एक तरफ से वार दिए गए हैं 
दोनों तरफ से मिलाने पर अग्नि वास आसानी से जाना जा सकता है |


यदि अग्नि वास पृथ्वी पर है तो सुखकारक
यदि आकाश में है तो प्राण हानिकारक
यदि पाताल में है तो धनहानि कारक होता है

Wednesday, February 6, 2019

नक्षत्रों के स्वामी देवता


किस नक्षत्र का स्वामी देवता कोन है |
किस देवता की पूजा से कोन सा नक्षत्र होता है प्रसन्न |

अश्विनी – अश्विनी कुमार
भरणी – यम
कृतिका – अग्नि
रोहिणी – ब्रह्मा
मृगशिरा – चन्द्रमा

Tuesday, February 5, 2019

किस दिन कोन से देवता की विशेष पूजा करें

तिथियों के स्वामी

किस तिथि को कोन से देवता की पूजा अधिक विशेष फलदायी होती है |

प्रतिपदा – अग्नि
द्वितीया – ब्रह्मा
तृतीया – गोरी
चतुर्थी – गणेश
पंचमी – नाग

Friendzone of Planets


ग्रहों की नैसर्गिक मैत्री

Sunday, November 18, 2018

Agni Vaas 2019-20

अग्नि वास देखने की विधि
सबसे पहले गणना के लिए ध्यान रखना है कि रविवार को 1 तथा शनिवार को 7 संख्या मानकर वार गिने जायेंगे |
शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को 1 तथा अमावस्या को 30 मानकर गणना होगी |

जिस दिन हवन करना हो उसी दिन की तिथि एवं वार की संख्या जोड़कर जो संख्या प्राप्त होगी उसमे 1(+) जोड़ें ,
तत्पश्चात 4 से भाग(divide) करें

Monday, May 21, 2018

Agni Vaas For 2018-19

अग्नि वास देखने की विधि
सबसे पहले गणना के लिए ध्यान रखना है कि रविवार को 1 तथा शनिवार को 7 संख्या मानकर वार गिने जायेंगे |
शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को 1 तथा अमावस्या को 30 मानकर गणना होगी |

जिस दिन हवन करना हो उसी दिन की तिथि एवं वार की संख्या जोड़कर जो संख्या प्राप्त होगी उसमे 1(+) जोड़ें ,
तत्पश्चात 4 से भाग(divide) करें

Friday, November 18, 2016

पिता सम्बन्धी चिंतन नवम भाव से या दशम भाव से ???



यह प्रश्न बहुत ही महत्व पूर्ण प्रश्न है कि पिता सम्बन्धी फलादेश नवम भाव से किया जाये या दशम भाव से,
बृहत् पराशर होरा-शास्त्र के २०वें अध्याय का चतुर्थ श्लोक है कि :
       भाग्य-स्थानात द्वितीये वा सूखे भौम समन्विते |
       भाग्येशे  नीच  राशिस्थे पिता  निर्धन एव हि ||

Wednesday, November 9, 2016

कुण्डली देखने के मूल नियम



१ – यदि कोई ग्रह किसी लग्न विशेष के लिए योग कारक हो परन्तु दिक् बल से शून्य हो तो ऊँचा फल नहीं कर सकता

२ – जब दो से अधिक ग्रहों का परस्पर सम्बन्ध हो तो कोई एक ग्रह अपनी दशा भुक्ति में उन गुणों कि अभिव्यक्ति करेगा जो उन ग्रहों में सांझे हैं जोकि इसे प्रभावित कर रहे हैं