अग्नि वास देखने की विधि
सबसे पहले गणना के लिए ध्यान रखना है कि रविवार को 1 तथा शनिवार को 7 संख्या मानकर वार गिने जायेंगे |
शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को 1 तथा अमावस्या को 30 मानकर गणना होगी |
ज्योतिष (गणित, फलित, प्रश्न एवं सिद्धांत), कुण्डली मिलान, मुहूर्त्त, होरा, कर्मकाण्ड, श्री राम कथा, श्रीमद्भागवत महापुराण कथा, श्री शिवपुराण कथा, रुद्राभिषेक, सुन्दरकाण्ड, कालसर्प शांति, महामृत्युंजय जप, दुर्गा पाठ, बगुलामुखी अनुष्ठान, नवग्रह शांति, विवाह, गृह प्रवेश, हवन यज्ञ इत्यादि वैदिक नियमानुसार कराने के लिए संपर्क करें । +91-78885-48882 +91-94645-32794
अग्नि वास देखने की विधि
सबसे पहले गणना के लिए ध्यान रखना है कि रविवार को 1 तथा शनिवार को 7 संख्या मानकर वार गिने जायेंगे |
शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को 1 तथा अमावस्या को 30 मानकर गणना होगी |
अग्नि
वास देखने की विधि
सबसे पहले गणना के लिए
ध्यान रखना है कि रविवार को 1
तथा शनिवार को 7 संख्या
मानकर वार गिने जायेंगे |
शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को 1 तथा अमावस्या को 30 मानकर गणना होगी |
अग्नि
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ध्यान रखना है कि रविवार को 1
तथा शनिवार को 7 संख्या
मानकर वार गिने जायेंगे |
शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को
1 तथा अमावस्या को 30
मानकर गणना होगी |
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तथा शनिवार को 7 संख्या
मानकर वार गिने जायेंगे |
शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को
1 तथा अमावस्या को 30
मानकर गणना होगी |
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शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को 1 तथा अमावस्या को 30 मानकर गणना होगी |
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शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को 1 तथा अमावस्या को 30 मानकर गणना होगी |
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शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को
1 तथा अमावस्या को 30
मानकर गणना होगी |
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शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को 1 तथा अमावस्या को 30 मानकर गणना होगी |
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तथा शनिवार को 7 संख्या
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शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को
1 तथा अमावस्या को 30
मानकर गणना होगी |
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सबसे पहले गणना के लिए
ध्यान रखना है कि रविवार को 1
तथा शनिवार को 7 संख्या
मानकर वार गिने जायेंगे |
शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को
1 तथा अमावस्या को 30
मानकर गणना होगी |
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सबसे पहले गणना के लिए
ध्यान रखना है कि रविवार को 1
तथा शनिवार को 7 संख्या
मानकर वार गिने जायेंगे |
शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को
1 तथा अमावस्या को 30
मानकर गणना होगी |
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सबसे पहले गणना के लिए
ध्यान रखना है कि रविवार को 1
तथा शनिवार को 7 संख्या
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शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को 1 तथा अमावस्या को 30 मानकर गणना होगी |
भगवान शिव के अनुष्ठान में
रुद्राभिषेक इत्यादि में शिव वास देखना अति आवश्यक कहा जाता है ।
महामृत्युञ्जय इत्यादि के
हवन के लिए भी यदि शिव वास देखा जाये तो बहुत उत्तम माना गया है ।
परन्तु विशेष रूप से शिव
लिंग तथा शिव मूर्ती की स्थापना एवं प्रतिष्ठा करने के लिए शिव वास देखना कहा गया
है ।
भगवान शिव का वास कोन से
पक्ष की कोन सी तिथि को किधर होता है और उसका क्या फल है यह हम आपको बताने जा रहे
हैं ।
भगवान शिव के अनुष्ठान में
रुद्राभिषेक इत्यादि में शिव वास देखना अति आवश्यक कहा जाता है ।
महामृत्युञ्जय इत्यादि के
हवन के लिए भी यदि शिव वास देखा जाये तो बहुत उत्तम माना गया है ।
परन्तु विशेष रूप से शिव
लिंग तथा शिव मूर्ती की स्थापना एवं प्रतिष्ठा करने के लिए शिव वास देखना कहा गया
है ।
भगवान शिव का वास कोन से
पक्ष की कोन सी तिथि को किधर होता है और उसका क्या फल है यह हम आपको बताने जा रहे
हैं ।
भगवान शिव के अनुष्ठान में
रुद्राभिषेक इत्यादि में शिव वास देखना अति आवश्यक कहा जाता है ।
महामृत्युञ्जय इत्यादि के
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परन्तु विशेष रूप से शिव
लिंग तथा शिव मूर्ती की स्थापना एवं प्रतिष्ठा करने के लिए शिव वास देखना कहा गया
है ।
भगवान शिव का वास कोन से
पक्ष की कोन सी तिथि को किधर होता है और उसका क्या फल है यह हम आपको बताने जा रहे
हैं ।
भगवान शिव के अनुष्ठान में
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परन्तु विशेष रूप से शिव
लिंग तथा शिव मूर्ती की स्थापना एवं प्रतिष्ठा करने के लिए शिव वास देखना कहा गया
है ।
भगवान शिव का वास कोन से
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पक्ष की कोन सी तिथि को किधर होता है और उसका क्या फल है यह हम आपको बताने जा रहे
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लिंग तथा शिव मूर्ती की स्थापना एवं प्रतिष्ठा करने के लिए शिव वास देखना कहा गया
है ।
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पक्ष की कोन सी तिथि को किधर होता है और उसका क्या फल है यह हम आपको बताने जा रहे
हैं ।