Thursday, October 8, 2015

Match Making

Vedic Astrology has an excellent and proven method of horoscope matching based on nakshatras (Lunar Constellations),

राहु काल विचार


ज्योतिष के प्राचीन शास्त्रों में राहु काल का उल्लेख नहीं मिलता लेकिन दक्षिण भारत में प्राचीन समय से इसका प्रचलन रहा है ।

Child Concieve or Delivery Muhurt

decide ur child's future before his birth

make the things favourable

Saturday, September 13, 2014

मांगलिक दोष



जब मंगल ग्रह जन्म कुण्डली में 1,4,7,8,12th भाव में हो तो मांगलिक दोष कहा जाता है ।

गण्डमूल


वैदिक ज्योतिष में २७ नक्षत्र माने जाते हैं

परिचय


इष्ट देव नागराजा, अपने पिता जी श्री देवेन्द्र प्रसाद सेमवाल जी, गुरु जी श्री दुर्गा प्रसाद भट्ट जी एवं भगवती महामाया की कृपा एवं आशीर्वाद स्वरुप ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उसमे अनुभव हासिल कर रहा हूँ।  पिछली पीढियों से ज्योतिष मुझे विरासत में मिला है।  मुझे गर्व है कि मुझे आदि शक्ति महामाया ने अपनी इस ग्रहों का अध्यन करने की गूढ़ रहस्यमयी विद्या का प्रयोग करने की अनुमति दी। कुण्डली में 12 भाव, 12 राशिया एवं 9 ग्रह होते हैं, ज्योतिषी जातक को अलग अलग भाव का अध्यन करके अलग अलग प्रश्न का उत्तर देता है । ज्योतिष यथार्थ है तथा फलादेश ज्योतिष के गणित ज्ञान एवं आध्यात्मिक ज्ञान पर नित्भर करता है। ज्योतिष शास्त्र के दो विभाग हैं, गणित विभाग तो केवल शास्त्र अध्यन का विषय है लेकिन फलित विभाग के लिए इष्ट साधना एवं गुरु कृपा आवश्यक है। ज्योतिषी अपने शास्त्र अध्यन, इष्ट साधना एवं गुरु कृपा के बल पर ही फलादेश कर पाने में समर्थ है। आशा करता हूँ कि समाज में ज्योतिष को लेकर जो भ्रांतियाँ फैली हुयी है उनको भी दूर कर सकू ।
मैं ब्लॉगर.कॉम का भी धन्यवाद करना चाहूँगा जिसने मुझे वेब स्पेस दिया, आज इन्टरनेट के माध्यम से किसी भी वस्तु या सेवा तक पहुचना सरल हो गया है। ब्लॉग शुरू करने के दिन मेरा एक लक्ष्य था कि ज्योतिष एवं संस्कृत का प्रचार प्रसार करूँगा। लेकिन समय की न्यूनता के चलते मैं ब्लॉग पर ध्यान नहीं दे पाया, अब जब पूर्ण रूपेण ज्योतिष को समर्पित हो चूका हूँ तो ब्लॉग के जरिये ज्योतिष, कर्मकाण्ड एवं संस्कृत का सही प्रचार प्रसार करना चाहूँगा। दुनिया में विद्या बहुत ज्यादा है लेकिन मनुष्य के पास आयु बहुत कम है सीखने को, इसलिए प्यारे मित्रो मुझे अपने सुझाव देकर समय समय पर कृतार्थ करें । ताकि मैं अपने काम और लक्ष्य में सफल हो सकू ।

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Friday, September 12, 2014

समस्या एवं समाधान





सेहत सम्बन्धी समस्या
क्या आप किसी बीमारी से जूझ रहे हैं? क्या आप बिगड़ती सेहत से परेशान हैं? क्या आप जल्दी बीमार हो जाते हैं? तो आपको उचित अनुभवी समाधान की आवश्यकता है 

ज्योतिष मूल सिद्धांत



12 राशियों में भ्रमण करने वाले ग्रहों में आत्मा सूर्य, मन चन्द्रमा, धैर्य मंगल, वाणी बुध, ज्ञान बृहस्पति, वीर्य शुक्र, एवं संवेदना को शनि का प्रतीक माना गया है।


ग्रहों का मानव जीवन पर प्रभाव :-


Tuesday, August 14, 2012

जो बोले सो अभय । बोल सनातन धर्म की जय ।।



वैदिक काल में भारतीय उपमहाद्वीप के धर्म के लिये 'सनातन धर्म' नाम मिलता है। 'सनातन' का अर्थ है - शाश्वत या 'हमेशा बना रहने वाला', अर्थात् जिसका न आदि है न अन्त। सनातन धर्म मूलत: भारतीय धर्म है, जो किसी ज़माने में पूरे वृहत्तर भारत (भारतीय उपमहाद्वीप) तक व्याप्त रहा है। विभिन्न कारणों से हुए भारी धर्मान्तरण के बाद भी विश्व के इस क्षेत्र की बहुसंख्यक आबादी इसी धर्म में आस्था रखती है। सिन्धु नद पार के वासियो को ईरानवासी हिन्दू कहते, जो 'स' का उच्चारण 'ह' करते थे। उनकी देखा-देखी अरब हमलावर भी तत्कालीन भारतवासियों को हिन्दू, और उनके धर्म को हिन्दू धर्म कहने लगे। भारत के अपने साहित्य में हिन्दू शब्द कोई १००० वर्ष पूर्व ही मिलता है, उसके पहले नहीं।
प्राचीन काल में भारतीय सनातन धर्म मेंगाणपतय, शैव वैष्णव,शाक्त और सौर नाम के पाँच सम्प्रदाय होते थे।गाणपतयगणेशकी वैष्णव विष्णु की, शैव शिव की और शाक्त शक्तिऔर सौर सूर्य की पूजा आराधना किया करते थे। पर यह मान्यता थी कि सब एक ही सत्य की व्याख्या हैं। यह न केवल ऋग्वेद परन्तु रामायण और महाभारत जैसे लोकप्रिय ग्रन्थों में भी स्पष्ट रूप से कहा गया है। प्रत्येक सम्प्रदाय के समर्थक अपने देवता को दूसरे सम्प्रदायों के देवता से बड़ा समझते थे और इस कारण से उनमें वैमनस्य बना रहता था। एकता बनाए रखने के उद्देश्य से धर्मगुरूओं ने लोगों को यह शिक्षा देना आरम्भ किया कि सभी देवता समान हैं, विष्णु, शिव और शक्ति आदि देवी-देवता परस्पर एक दूसरे के भी भक्त हैं। उनकी इन शिक्षाओं से तीनों सम्प्रदायों में मेल हुआ और सनातन धर्म की उत्पत्ति हुई। सनातन धर्म में विष्णु, शिव और शक्ति को समान माना गया और तीनों हीसम्प्रदाय के समर्थक इस धर्म को मानने लगे। सनातन धर्म का सारा साहित्य वेद, पुराण, श्रुति, स्मृतियाँ,उपनिषद्, रामायण, महाभारत, गीता आदि संस्कृत भाषा में रचा गया है। कालान्तर में भारतवर्ष में मुसलमान शासन हो जाने के कारण देवभाषा संस्कृत का ह्रास हो गया तथा सनातन धर्म की अवनति होने लगी। इस स्थिति को सुधारने के लिये विद्वान संत तुलसीदास ने प्रचलित भाषा में धार्मिक साहित्य की रचना करके सनातन धर्म की रक्षा की। जब औपनिवेशिक ब्रिटिश शासन को ईसाई, मुस्लिम आदि धर्मों के मानने वालों का तुलनात्मक अध्ययन करने के लिये जनगणना करने की आवश्यकता पड़ी तो सनातन शब्द से अपरिचित होने के कारण उन्होंने यहाँ के धर्म का नाम सनातन धर्म के स्थान पर हिंदू धर्म रख दिया।
सनातन धर्म हिन्दू धर्म का वास्तविक नाम है।.


६ दर्शन शास्त्र –
न्याय – गौतम मुनि
वैशेषिक – कणाद मुनि
साङ्ख्य – कपिल मुनि
योग – पतञ्जलि मुनि
मीमान्सा – जैमिनी मुनि
वेदान्त – व्यास मुनि


६ वेदाङ्ग     -
शिक्षा – नासिका
व्याकरण – मुख
निरुक्त – कान
ज्योतिष – नेत्र चक्षु*
कल्प – हाथ
छन्द – चरण


वेद          -     ब्राह्मण            -     उपवेद
ऋग्वेद       -     एतरेय       -     आयुर्वेद
यजुर्वेद       -     शतपथ       -     धनुर्वेद
सामवेद      -     तांड्य        -     गन्धर्ववेद

अथर्ववेद     -     गोपथ        -     अर्थवेद